तीन रुपए के पेन की बिक्री में मुनाफ़े ने सिखाया करोड़पति बनने का तरीक़ा
03-Apr-2025
By सोफ़िया दानिश खान
नई दिल्ली
दस साल की उम्र में जतिन आहूजा ने एक दोस्त को तीन रुपए में एक पेन बेचा और छोटा सा मुनाफ़ा कमाया.
आज 32 साल की उम्र में वो ‘बिग ब्वाय टॉयज़’ के मालिक हैं.
‘बिग ब्वाय टॉयज़’ सेकंड हैंड हाई-ऐंड कारों जैसे बीएमडब्ल्यू, ऑडी, लैंबोरघीनी और रेंज रोवर का नामी रीटेल ब्रैंड है, जिसका सालाना टर्नओवर 250 करोड़ रुपए है.
गुड़गांव (अब गुरुग्राम) में आप ‘बिग ब्वाय टॉयज़’ (बीबीटी) के तीन मंज़िला शोरूम को अनदेखा नहीं कर सकते.
शोरूम के अंदर 50 लाख से चार करोड़ रुपए तक की कारें प्रदर्शित हैं.
![]() |
साल 2005 में मुंबई में आई बाढ़ से प्रभावित हुई एक मर्सिडीज़ को जतिन आहूजा ने ठीक किया और 25 लाख रुपए के मुनाफ़े में बेचा. इसी के बाद साल 2007 में बीबीटी का जन्म हुआ. (सभी फ़ोटो : नवनिता)
|
जतिन यह सुनिश्चित करते हैं कि ग्राहक को कार उत्कृष्ट स्थिति में मिले और कार पुरानी जैसी नहीं दिखे.
जतिन बताते हैं, “बेचने के लिए रखे जाने से पहले हर कार क्वालिटी चेक के 150 स्टेप्स से गुज़रती है. हम ग्राहकों को कार के मेंटेनेंस के बारे में भी बताते हैं.”
बीबीटी का सपना देखने और इसे इस मुकाम तक लाने वाले जतिन बताते हैं, “हम 20 प्रतिशत पैसा लेते हैं और शेष राशि का लोन भी करवा देते हैं. कार वापस लेने की भी गारंटी देते हैं और उसके इस्तेमाल को देखते हुए 60-80 प्रतिशत क़ीमत वापस कर देते हैं.”
जतिन दिल्ली में पैदा हुए और पले-बढ़े. उन्होंने माता जय कौर पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की और फिर साल 2002 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से बीटेक की डिग्री ली. वो अपनी बैच के टॉपर्स में से एक थे.
लेकिन उन्हें हमेशा से कार से प्यार था. कॉलेज पूरा करने के मात्र छह महीने बाद उन्होंने 70,000 रुपए में पुरानी फिएट पालियो ख़रीदी और उसके नवीकरण पर 1.3 लाख रुपए ख़र्च किए. यह पैसा उन्होंने अपने पिता से लिया, जो जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट थे.
लेकिन बाज़ार में इस कार को अच्छे दाम नहीं मिले.
जतिन बताते हैं, “मुझे जो सबसे अच्छा ऑफ़र मिला, वो 1.5 लाख था. इसका मतलब था कि अगर मैं कार उस दाम पर बेचता तो मुझे 50,000 रुपए का नुकसान होता. मैं बहुत निराश हुआ और मैंने कार ख़ुद ही इस्तेमाल करने का फ़ैसला किया.”
साल 2005 में उन्हें पहली बार किसी डील में मुनाफ़ा हुआ.
उन्होंने एक ऐसी मर्सिडीज़ कार ख़रीदी, जिसे मुंबई में आई बाढ़ में नुकसान पहुंचा था. जतिन ने उस कार को ठीक करवाया और 25 लाख रुपए के मुनाफ़े पर बेचा.
अपने पहले क्लाइंट के बारे में जतिन बताते हैं, “वो बाद में मेरे मेंटर, गाइड, इंस्पिरेशन और बहुत अच्छे दोस्त बन गए. उनसे मैंने सीखा कि कैसे एक फ़र्स्ट जेनरेशन बिज़नेसमैन भी चमत्कार कर सकता है.”
![]() |
बीबीटी से हाई-ऐंड बाइक्स की बिक्री भी की जाती है.
|
साल 2006 में जतिन ने देखा कि लोग फ़ैंसी मोबाइल नंबरों के दीवाने हैं. उन्होंने वोडाफ़ोन से 9999 सिरीज़ के 1,200 सिम कार्ड ख़रीदे और ग्राहकों को बेचकर थोड़े समय में 24 लाख रुपए कमाए.
साल 2007 तक उन्होंने ख़ुद की बचत और अपने पिता के पैसे से दो करोड़ रुपए इकट्ठा किए. इस पैसे से उन्होंने मैगस कार्स लिमिटेड नामक कंपनी शुरू की, जो दुनिया भर से नई कारें इम्पोर्ट करती थी और उन्हें भारत में बेचती थी.
लेकिन जल्द ही परेशानियां खड़ी हो गईं. ग्राहक आम तौर पर अपनी पुरानी कारों को एक्सचेंज कर नई गाड़ियां ख़रीद लेते थे, लेकिन जतिन के लिए पुरानी कारों को ठिकाने लगाना आसान नहीं था.
जतिन बताते हैं, “यहीं पर कंपनी को नुकसान होने लगा. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पुरानी कारों का क्या किया जाए. इस बिज़नेस के कई लोगों ने भी मुझे ग़लत सलाह दी.”
लेकिन वक्त बदला और वो अपने बिज़नेस में बदलाव लेकर आए. पुरानी मर्सिडीज कार को ख़रीदकर अच्छे मुनाफ़े पर बेचने का प्रयोग उन्हें वापस इस बिज़नेस की तरफ़ खींच लाया.
साल 2009 में उन्होंने ‘बिग ब्वाय टॉयज़’ या बीबीटी लॉन्च की. यहां सेकंड हैंड लग्ज़री कारों को पुनर्सज्जा कर बेचा जाता था.
बीबीटी ब्रैंड इतना हिट हुआ कि पहले साल में ही कंपनी का टर्नओवर छह करोड़ रुपए पहुंच गया. तबसे इसमें लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है.
बीबीटी शुरू करने के 10 साल से भी कम समय यानी 2016 में कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ रुपए पार कर गया.
गुड़गांव के अलावा बीबीटी का एक अन्य शोरूम दक्षिण दिल्ली में है. कंपनी की योजना मुंबई और हैदराबाद में भी शोरूम खोलने की है.
![]() |
कंपनी का सालाना टर्नओवर 1,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाना ही जतिन का लक्ष्य है.
|
जतिन सभी मेट्रो शहरों में अपने शोरूम खोलना चाहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि आने वाले सालों में भारत में इस्तेमाल की गई कारों की बिक्री नई कार की बिक्री को पार कर जाएगी.
आज कंपनी में क़रीब 100 कर्मचारी हैं और वो सभी कार के दीवाने हैं.
जतिन खुद दो करोड़ की रेंज रोवर ऑटोबायोग्राफ़ी सुपरचार्ज्ड कार चलाते हैं जिसकी नंबर प्लेट है डीडीसी-1. उनकी ड्रीम कार है साढ़े चार करोड़ की रोल्स रॉयल फ़ैंटम.
![]() |
गुड़गांव स्थित शोरूम में बीबीटी के स्टाफ़ के साथ जतिन.
|
जतिन की मानें तो नोटबंदी से कार की बिक्री पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ा, क्योंकि अधिकतर लोग लोन लेते हैं, वहीं जीएसटी से बिक्री प्रभावित हुई.
जतिन के मुताबिक, “लग्ज़री कारों को 48 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में रखा गया था, जिसका नकारात्मक असर हुआ था. जब मैंने मारुति, महिंद्रा और टाटा जैसी कंपनियों के साथ सरकारी विभागों से बात की और इसे ठीक करने को कहा, तब इसे बदलकर 18 प्रतिशत कर दिया गया.”
इस्तेमाल की गई कारों के अलावा बीबीटी नई मैसेराती, बीएमडब्ल्यू ई-4 कार भी बेचती है.
उन्होंने सचिन तेंदुलकर और शाहरुख खान की इस्तेमाल की गई कारें भी खरीदीं. जतिन इन-फ़िल्म ब्रैंडिंग के लिए फ़िल्म एजेंसियों और प्रोड्यूसरों के साथ भी काम करते हैं.
पब्लिसिटी का फ़ायदा हुआ और उसका नतीजा यह कि आज बीबीटी के साथ हनी सिंह, युवराज सिंह, दिनेश कार्तिक और विराट कोहली जैसी हस्तियां जुड़ी हुई हैं.
जतिन हर महीने क़रीब 30 कार बेचते हैं.
![]() |
बीबीटी शोरूम के भीतर बिक्री के लिए रखी गई हाई-ऐंड कारों का नज़ारा.
|
जतिन का लक्ष्य है कंपनी के टर्नओवर को 250 करोड़ से बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपए तक ले जाना. वो यह विरासत अपनी बेटी ज़ारा के लिए सहेजना चाहते हैं और उसके लिए उसी तरह प्रेरणा बनना चाहते हैं, जैसे उनके पिता बने थे.
आप इन्हें भी पसंद करेंगे
-
चार्टर्ड अकाउंटेंट से चाय वाला
रॉबिन झा ने कभी नहीं सोचा था कि वो ख़ुद का बिज़नेस करेंगे और बुलंदियों को छुएंगे. चार साल पहले उनका स्टार्ट-अप दो लाख रुपए महीने का बिज़नेस करता था. आज यह आंकड़ा 50 लाख रुपए तक पहुंच गया है. चाय वाला बनकर लाखों रुपए कमाने वाले रॉबिन झा की कहानी, दिल्ली में नरेंद्र कौशिक से. -
‘अंत्येष्टि’ के लिए स्टार्टअप
जब तक ज़िंदगी है तब तक की ज़रूरतों के बारे में तो सभी सोच लेते हैं लेकिन कोलकाता का एक स्टार्ट-अप है जिसने मौत के बाद की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर 16 लाख सालाना का बिज़नेस खड़ा कर लिया है. कोलकाता में जी सिंह मिलवा रहे हैं ऐसी ही एक उद्यमी से - -
स्मूदी सम्राट
हैदराबाद के सम्राट रेड्डी ने इंजीनियरिंग के बाद आईटी कंपनी इंफोसिस में नौकरी तो की, लेकिन वे खुद का बिजनेस करना चाहते थे. महज एक साल बाद ही नौकरी छोड़ दी. वे कहते हैं, “मुझे पता था कि अगर मैंने अभी ऐसा नहीं किया, तो कभी नहीं कर पाऊंगा.” इसके बाद एक करोड़ रुपए के निवेश से एक स्मूदी आउटलेट से शुरुआत कर पांच साल में 110 आउटलेट की चेन बना दी. अब उनकी योजना अगले 10 महीने में इन्हें बढ़ाकर 250 करने की है. सम्राट का संघर्ष बता रही हैं सोफिया दानिश खान -
खिलाड़ी से बने बस कंपनी के मालिक
साल 1985 में प्रसन्ना पर्पल कंपनी की सालाना आमदनी तीन लाख रुपए हुआ करती थी. अगले 10 सालों में यह 10 करोड़ रुपए पहुंच गई. आज यह आंकड़ा 300 करोड़ रुपए है. प्रसन्ना पटवर्धन के नेतृत्व में कैसे एक टैक्सी सर्विस में इतना ज़बर्दस्त परिवर्तन आया, पढ़िए मुंबई से देवेन लाड की रिपोर्ट -
परेशानी से निकला बिजनेस आइडिया
बेंगलुरु से पुड्डुचेरी घूमने गए दो कॉलेज दोस्तों को जब बाइक किराए पर मिलने में परेशानी हुई तो उन्हें इस काम में कारोबारी अवसर दिखा. लौटकर रॉयल ब्रदर्स बाइक रेंटल सर्विस लॉन्च की. शुरुआत में उन्हें लोन और लाइसेंस के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा, लेकिन मेहनत रंग लाई. अब तीन दोस्तों के इस स्टार्ट-अप का सालाना टर्नओवर 7.5 करोड़ रुपए है. रेंटल सर्विस 6 राज्यों के 25 शहरों में उपलब्ध है. बता रहे हैं गुरविंदर सिंह