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Friday, 15 October 2021

पारंपरिक नल्ली सिल्क्स को हर आधुनिक महिला की पसंद बनाया

15-Oct-2021 By उषा प्रसाद
बेंगलुरु

Posted 27 Dec 2017

लावण्या नल्ली के परदादा नल्ली चिन्नासामी चेट्टी ने 19वीं शताब्दी के आख़िरी सालों में चेन्नई में सिल्क साड़ियां बेचनी शुरू की थीं.

 

वो अपने गृहनगर कांचीपुरम से साइकिल पर साड़ियां लाते और 70 किलोमीटर दूर चेन्नई (पहले मद्रास) में बेचते थे.

साल 1928 में, उन्होंने चेन्नई के टी नगर में एक छोटी दुकान खोली. क़रीब नौ दशक बाद आज नल्ली सिल्क्स सिल्क साड़ियों का ब्रैंड बन चुका है और भारतभर व विदेशों में इसके 32 स्टोर खुल चुके हैं. इनमें दो स्टोर अमेरिका और सिंगापुर में हैं.

 

साल 2012 में परिवार ने रिटेल आभूषणों के क्षेत्र में क़दम रखा.

नल्ली समूह की पांचवीं पीढ़ी की वंशज लावण्या नल्ली ने युवाओं को आकर्षित करने के लिए नल्ली नेक्स्ट की शुरुआत की. साल 2005 में बिज़नेस से जुड़ने के बाद उन्होंने पारिवारिक कारोबार के संपूर्ण विकास में योगदान दिया है. (फ़ोटो - एचके राजशेखर)

तैंतीस साल की लावण्या इस पारिवारिक कारोबार से जुड़ने वाली पहली महिला हैं और छोटे से ही वक्त में उन्होंने इस क्षेत्र में अपना लोहा मनवा लिया है.

650 करोड़ रुपए सालाना कारोबार करने वाले नल्ली सिल्क्स की इस मृदुभाषी पीढ़ी ने नए स्टोर खोलने और कंपनी का राजस्व बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई है.

लावण्या कहती हैं, “कारोबार में मेरे शामिल होने को लेकर मेरे पिता को शुरुआत में शंका थी, लेकिन मैं इसका हिस्सा बनने को लेकर अडिग रही और मैंने कारोबार करने की बारीकियां सीखने की इच्छा जताई, तो वो मान गए.”

कारोबार से जुड़ने के कुछ समय बाद ही साल 2007 में लावण्या ने आधुनिक महिलाओं के लिए नल्ली नेक्स्ट नाम से नया ब्रांड लॉन्च किया, जो एक मास्टर स्ट्रोक रहा.


लावण्या को नल्ली नेक्स्ट लॉन्च करने का आइडिया स्टोर आने वाले युवा ख़रीदारों से बातचीत करने के बाद आया. ग्राहकों में धारणा थी कि नल्ली शादी की साड़ियां या सिल्क साड़ियों की ख़रीदारी के लिए तो सही जगह हैं लेकिन यहां युवाओं के लिए कुछ ख़ास नहीं है.

लावण्या बताती हैं, “ख़रीदार सीधे सिल्क साड़ियों के सेक्शन में जाते और हमारे दूसरे कलेक्शंस को देखे बिना ख़रीदी कर लौट जाते. हमारे डिज़ाइनर साड़ियों के कलेक्शन की तरफ़ किसी का ध्यान नहीं जा रहा था.”

जल्द ही लावण्या ने बिज़नेस को बेहतर तरीक़े से समझने के लिए ग्राहकों के व्यवहार का अध्ययन करना शुरू कर दिया.

वो कहती हैं, “मैंने जो कुछ सीखा, वो काम करते वक्त सीखा, या फिर स्टोर में काम करने वालों से सीखा.”

अध्ययन के इस दौर में उन्होंने चेन्नई में अपने प्रमुख स्टोर के वाचमैन से कहा कि वो उन लोगों की गिनती करे, जो बिना कोई ख़रीदारी किए स्टोर से जाते थे.

यह संख्या उनके हाथों में नल्ली बैग की मौजूदगी से पता लगाई गई.

लावण्या सही साबित हुईं. वो बताती हैं, “हमने पाया कि लड़कियां अपने माता-पिता के साथ स्टोर आती तो थीं, लेकिन अपने लिए कुछ नहीं ख़रीदती थीं.”

नल्ली नेक्स्ट की शुरुआत ने यह परंपरा भी तोड़ दी. लावण्या कहती हैं, “इस विचार को परखने के लिए मैंने चेन्नई के अलवरपेट पर एक छोटा स्टोर खोला. यह अच्छा चला. बाद में हमने बेंगलुरु और मुंबई में भी दो स्टोर खोले.”

लावण्या ने हॉर्वर्ड बिज़नेस स्कूल से एमबीए किया है.

 

लावण्या ने डिज़ाइनर उत्पाद बनाने के लिए विभिन्न कारीगरों के साथ काम किया. ‘नल्ली नेक्स्ट’ में क्रेप, शिफॉन समेत डिज़ाइनर साड़ियों के साथ-साथ रेडीमेड गारमेंट और विभिन्न कपड़े मिलते हैं.

अन्ना विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में बैचलर डिग्री लेने के ठीक बाद वे नल्ली से पहली बार जुड़ीं और उन्होंने 2005 से 2009 तक काम किया.

इस दौरान नल्ली का राजस्व 44 मिलियन डॉलर से बढ़कर 100 मिलियन डॉलर हो गई और स्टोर की संख्या 14 से बढ़कर 21 हो गई.

लावण्या ने एमबीए करने के लिए कारोबार से छुट्टी ली और 2009 में हॉर्वर्ड बिज़नेस स्कूल में एडमिशन ले लिया. वहां से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने शिकागो में मैकिंज़े एंड कंपनी में तीन साल काम किया.

हॉर्वर्ड में ही उनकी मुलाक़ात आईआईटी कानपुर से पास अभय कोठारी से हुई. दोनों ने 2011 में शादी कर ली और शिकागो आ गए.

यहां लावण्या ने मैकिंजे में नौकरी कर ली, जबकि अभय ने बूज़ एंड कंपनी में नौकरी शुरू की.

दोनों कामकाज के सिलसिले में बड़े पैमाने पर यात्राएं करते और सोमवार से शुक्रवार तक एक-दूसरे से अलग रहते. यह क्रम तीन साल तक चला. इसके बाद एक-दूसरे के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के लिए दोनों ने अवकाश लिया और भारत लौटने से पहले कुछ समय घूमे.


साल 2014 में भारत आने के बाद लावण्या फ़ैशन पोर्टल Myntra.com से जुड़ गईं और वाइस प्रेसिडेंट (रेवेन्यू ऐंड शॉपिंग एक्सपीरियंस) पद पर काम किया.

नल्ली समूह में लौटने से पहले लावण्या ने कुछ वक्त फ़ैशन पोर्टल Myntra.com में वाइस प्रेसिडेंट (रेवेन्यू ऐंड शॉपिंग एक्सपीरियंस) पद पर काम किया.

लावण्या ख़ुलासा करती हैं, “भारत लौटने के बाद मेरी मुलाकात फ्लिपकार्ट में काम कर रहे मेरे एक दोस्त से हुई. चूंकि मैं उपभोक्ता और खुदरा बाज़ार को लेकर उत्सुक थी, इसलिए उसने सुझाव दिया कि मै Myntra से जुड़ूं, जिसे फ्लिपकार्ट ने अधिग्रहित कर लिया था.”
 

2015 के आख़िर में लावण्या ने Myntra को छोड़ दिया और नल्ली में दोबारा शामिल हो गईं. उन्होंने कंपनी के ई-कॉमर्स ऐंड ओम्नीचैनल प्लेटफ़ॉर्म के वाइस चेयरमैन के पद पर ज्वाइन किया.

वो कहती हैं, “इंजीनियरिंग के बाद जब मैंने बिज़नेस ज्वाइन किया था, तब मेरे पिता इससे बहुत ज़्यादा ख़ुश नहीं थे, लेकिन इस बार उन्होंने मेरा स्वागत किया.”

जहां लावण्या ने ई-कॉमर्स और प्राइवेट लेबल का कामकाज देखा, उनके पिता रामनाथन नल्ली ने विदेशों में स्टोर्स के कामकाज, निर्यात और ऑफ़-लाइन स्टोर्स की ज़िम्मेदारी संभाली.

छोटे भाई निरांथ नल्ली के आभूषणों के बिज़नेस को देख रहे हैं.

उनका परिवार इस बिज़नेस को लेकर कितना कटिबद्ध है, वो इसकी मिसाल देती हैं.

वो कहती हैं, “द्वितीय विश्वयुद्ध में लोगों को लगा था कि मद्रास पर बमबारी हो सकती है और व्यापारियों ने शहर छोड़कर भागना शुरू कर दिया था.

“लेकिन नल्ली परिवार कहीं नहीं गया. चिन्नासामी के बेटे नारायणसामी ने अपने स्टोर को खुला रखने का फ़ैसला किया. नारायणसामी उसूलों के पक्के माने जाते थे.”

लावण्या स्पष्ट करती हैं, “चूंकि पूरे शहर में नल्ली ही एकमात्र स्टोर था जो खुला था, इसलिए मद्रासभर से लोग एक रूमाल तक ख़रीदने नल्ली स्टोर आते थे. इस तरह ब्रैंड की साख बेहतर हुई और यह गुणवत्तापूर्ण कपड़े बेचने के लिए जाना जाने लगा.”

नल्ली नेक्स्ट अपने डिज़ाइनर कलेक्शन से युवा महिलाओं को लुभाने में सफल रहा, जो मूल ब्रांड करने में असमर्थ रहा था.

तीसरी पीढ़ी के कुप्पूस्वामी चेट्टी ने 1956 में बिज़नेस की बागडोरी संभाली और उनकी अगुआई में नल्ली ने ज़बर्दस्त तरक्की की. बाद में लावण्या के पिता रामनाथन नल्ली भी बिज़नेस में शामिल हो गए और उन्होंने नल्ली सिल्क्स के चेन्नई के बाहर दिल्ली-मुंबई में स्टोर खोले.

लावण्या बताती हैं, “जब बिज़नेस अच्छा चलने लगा, तो मेरे पिता ने महसूस किया कि अवसर हर जगह मौजूद थे. उन्होंने अस्सी के दशक के आख़िर में हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय से एग्ज़ीक्यूटिव एमबीए करने का फ़ैसला किया. इस तज़ुर्बे ने उन्हें कारोबार का विस्तार करने में बहुत मदद की.”

लावण्या ने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए दो हार्डवेयर कंपनियों और नल्ली में काम किया. बीई की पढ़ाई पूरी करने के बाद 21 साल की उम्र में उन्होंने नल्ली समूह के प्रेसिडेंट की कुर्सी संभाल ली.

लावण्या अब बेंगलुरु में रहती हैं. उनका ध्यान न सिर्फ़ नल्ली के विस्तार पर है, बल्कि सात महीने के बेटे रूद्र को बड़ा करने पर भी है. उनके पति अभय ने अपना खुद का इंटीग्रेटेड कोल्ड सप्लाई चेन सॉल्यूशन का बिज़नेस शुरू किया है.

बेंगलुरु में हाल ही में शुरू किए गए शोरूम में ग्राहकों के साथ लावण्या.

 

लावण्या का तात्कालिक लक्ष्य अगले पांच सालों में बिना कंपनी के मूल्यों से समझौता किए नल्ली स्टोर्स की संख्या को दोगुना करना है. जैसे नल्ली की नो डिस्काउंट पॉलिसी में बदलाव का उनका कोई इरादा नहीं है.

“दशकों पहले, 1940 में मेरे परदादा ने फ़ैसला किया था कि वो सामान पर कोई डिस्काउंट नहीं देंगे. उस फ़ैसले से हमें कारोबारी उत्कृष्टता हासिल करने में बहुत मदद मिली.

“मैं चाहे कोई भी बदलाव लाऊं, पीढ़ियों की मेहनत से बने इस व्यापार के मूल्यों से कोई समझौता नहीं होगा.”


 

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