Milky Mist

Tuesday, 16 April 2024

‘अपनी ज़िंदगी संवारने के लिए कभी देर नहीं होती, अपने जीने का मकसद तय करें और सफलता को ही लक्ष्य बना लें’

16-Apr-2024 By पी सी विनोज कुमार की क़लम से
चेन्नई

Posted 27 Dec 2017

3 सितंबर, 2010 को सकारात्मक पत्रकारिताके विचार के साथ द वीकेंड लीडर ने एक ऑनलाइन अंग्रेज़ी पत्रिका के रूप में अपना सफर शुरू किया था. उस समय कई लोग संदेह करते थे कि केवल सकारात्मक ख़बरों पर केंद्रित कोई भी प्रकाशन सफल नहीं हो सकता, क्योंकि पाठक इस तरह की सामग्री पढ़ना पसंद नहीं करेंगे.

अच्छी ख़बर यह है कि हमने अपने आलोचकों को ग़लत साबित किया है. सात सालों से जारी इस सफ़र को और भी आगे बढ़ाने के लिए हम स्थानीय भाषाओं में नए संस्करण शुरू कर रहे हैं. इस साल अप्रैल माह में हम अपना तमिल संस्करण लाए थे, और आज 27 दिसंबर, 2017 को हमारे हिंदी भाषा के संस्करण का शुभारंभ हो गया है.

वीकेंड लीडर में विशेष स्थान प्राप्त गुमनाम नायकों में से एक हैं ऑटो अन्नादुराई. चेन्नई के ऑटो चालक अन्नादुराई ने अपनी गाड़ी में ग्राहकों के लिए कई सुख-सुविधाएं जुटाई हैं. उनके ऑटो में विभिन्न अखबारों व पत्रिकाओं के अलावा वाईफाई नेटवर्क उपलब्ध रहता  है. यही नहीं टीवी, लैपटॉप, टैबलेट और आईपैड भी मौजूद रहते हैं. (फ़ोटो - एच के राजशेकर)


स्थानीय भाषाओं में नए संस्करण शुरू किए जाने का ख़ास मकसद द वीकेंड लीडर के अंग्रेज़ी संस्करण में प्रकाशित उद्यमियों की सफलता के क़िस्सों और कई प्रेरणादायी लेखों को लोगों की सुविधानुसार अन्य भाषाओं में उपलब्ध करवाना है.

 

हम यह मानते हैं कि अंग्रेज़ी भाषा के सीमित ज्ञान की वजह से कोई भी पाठक ऐसे प्रेरणादायी लेखों से वंचित न रहे, जिन्हें हमने देशभर के कई अनुभवी पत्रकारों की मदद से सावधानीपूर्वक तैयार है. हमारे पाठकों के क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशन करने के सुझावों से भी हमें स्थानीय भाषी संस्करण शुरू करने का काफ़ी प्रोत्साहन व हौसला मिला.

 

इस हिंदी संस्करण में शुरुआती कुछ महीने कई सफल उद्यमियों की प्रेरक कहानियां पाठकों तक पहुंचाने की हमारी योजना है. हालांकि आने वाले समय में आपको विविधता भरी पाठ्य सामग्री मिलेगी और हम लोगों के दिलों में जगह बनाने में सफल रहेंगे.

 

अब तक लोग दोस्तों व बच्चों को उपहार स्वरूप प्रेरणादायक किताबें देते आए हैं, अब उसकी जगह द वीकेंड लीडरके रूप में ख़ुशियां बांटने का विकल्प भी लोगों के पास मौजूद रहेगा. आप हमारे लेख फ़ेसबुक व वाट्सएप के ज़रिये भी साझा कर सकते हैं.

 

अपनी ज़िंदगी संवारने के लिए कभी देर नहीं होती, अपने जीने का मकसद तय करें और सफलता को ही लक्ष्य बना लें. मैं बेहद विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि हमारी पत्रिका के नियमित पाठक बनने पर आप अभी के मुकाबले और बेहतर व्यक्ति के रूप में ढल जाएंगे, और अपनी ज़िंदगी एक अच्छे मकसद के साथ जिएंगे.

 

पढ़ते रहिए, आगे बढ़ते रहिए!

 

पी सी विनोज कुमार द वीकेंड लीडर के संस्थापक संपादक हैं.


 

आप इन्हें भी पसंद करेंगे

  • how a boy from a small-town built a rs 1450 crore turnover company

    जिगर वाला बिज़नेसमैन

    सीके रंगनाथन ने अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए जब घर छोड़ा, तब उनकी जेब में मात्र 15 हज़ार रुपए थे, लेकिन बड़ी विदेशी कंपनियों की मौजूदगी के बावजूद उन्होंने 1,450 करोड़ रुपए की एक भारतीय अंतरराष्ट्रीय कंपनी खड़ी कर दी. चेन्नई से पीसी विनोज कुमार लेकर आए हैं ब्यूटी टायकून सीके रंगनाथन की दिलचस्प कहानी.
  • Punjabi girl IT success story

    इस आईटी कंपनी पर कोरोना बेअसर

    पंजाब की मनदीप कौर सिद्धू कोरोनावायरस से डटकर मुकाबला कर रही हैं. उन्‍होंने गांव के लोगों को रोजगार उपलब्‍ध कराने के लिए गांव में ही आईटी कंपनी शुरू की. सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपए है. कोरोना के बावजूद उन्‍होंने किसी कर्मचारी को नहीं हटाया. बल्कि सबकी सैलरी बढ़ाने का फैसला लिया है.
  • Free IAS Exam Coach

    मुफ़्त आईएएस कोच

    कानगराज ख़ुद सिविल सर्विसेज़ परीक्षा पास नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने फ़ैसला किया कि वो अभ्यर्थियों की मदद करेंगे. उनके पढ़ाए 70 से ज़्यादा बच्चे सिविल सर्विसेज़ की परीक्षा पास कर चुके हैं. कोयंबटूर में पी.सी. विनोज कुमार मिलवा रहे हैं दूसरों के सपने सच करवाने वाले पी. कानगराज से.
  • success story of two brothers in solar business

    गांवों को रोशन करने वाले सितारे

    कोलकाता के जाजू बंधु पर्यावरण को सहेजने के लिए कुछ करना चाहते थे. जब उन्‍होंने पश्चिम बंगाल और झारखंड के अंधेरे में डूबे गांवों की स्थिति देखी तो सौर ऊर्जा को अपना बिज़नेस बनाने की ठानी. आज कई घर उनकी बदौलत रोशन हैं. यही नहीं, इस काम के जरिये कई ग्रामीण युवाओं को रोज़गार मिला है और कई किसान ऑर्गेनिक फू़ड भी उगाने लगे हैं. गुरविंदर सिंह की कोलकाता से रिपोर्ट.
  • Just Jute story of Saurav Modi

    ये मोदी ‘जूट करोड़पति’ हैं

    एक वक्त था जब सौरव मोदी के पास लाखों के ऑर्डर थे और उनके सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए. लेकिन उन्होंने पत्नी की मदद से दोबारा बिज़नेस में नई जान डाली. बेंगलुरु से उषा प्रसाद बता रही हैं सौरव मोदी की कहानी जिन्होंने मेहनत और समझ-बूझ से जूट का करोड़ों का बिज़नेस खड़ा किया.