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Monday, 27 June 2022

नौकरी की तलाश छोड़ दो युवाओं ने आठ महीने में 67 लाख रुपए टर्नओवर का मुनाफे वाला बिजनेस बना लिया

27-Jun-2022 By पार्थो बर्मन
चेन्नई

Posted 08 Apr 2021

कॉलेज के दो दोस्तों का जुनून था कि खुद का कोई व्यवसाय शुरू करें. पिछले साल कोविड-19 के लॉकडाउन के दौरान चूंकि उनके पास कोई काम नहीं था, तब उनके उद्यमी बनने की राह खुल गई.

27 साल के चंद्र शेखर सिंह और 28 साल के प्रतीक भोसले ने 20 लाख रुपए का निवेश कर वेलस्पायर कंपनी लॉन्च की. यह एक इलेक्ट्रिक प्रेशर कूकर ब्रांड है, जो अमेजन पर उपलब्ध है.
चंद्र शेखर सिंह और प्रतीक भोसले ने लॉकडाउन के दौरान अमेजन पर वेलस्पायर मल्टी कूकिंग पॉट लॉन्च किया. (फोटो: विशेष व्यवस्था से/टीडब्ल्यूएल)

दोनों दोस्त कहते हैं कि वे महज आठ महीनों में 67 लाख रुपए की बिक्री कर चुके हैं. उन्होंने जितनी राशि निवेश की थी, वह वापस आ चुकी है और अब वे मुनाफे में हैं.

सिंह कहते हैं, “हमने अगस्त 2020 में शुरुआत की थी और अब तक 3,000 सेट बेच चुके हैं. हम फिलहाल अप्लाइंसेस जापान और चीन से आयात कर रहे हैं. लेकिन हमारी योजना है कि अगले साल तक हम भारत में अपना प्लांट शुरू कर दें.”

कूकर को एक से अधिक काम करने और अन्य अप्लाइंसेस जैसे राइस कूकर, प्रेशर कूकर, सॉट पैन, स्लो कूकर, स्टीमर, योगर्ट मैकर, फूड वॉर्मर और गैस सिलेंडर के काम करने के लिए बनाया गया है.

यह अप्लाइंस महज 30 मिनट में 14 अलग-अलग फूड आइटम पका सकता है. यह उबालने, छौंक लगाने, भूनने, सेंकने और भाप से पकाने जैसे काम कर सकता है.

उनके अधिकतर ग्राहक हैदराबाद, चेन्नई और केरल के हैं. अब उन्हें मुंबई, दिल्ली और अन्य शहरों के ग्राहकों से भी पूछताछ मिलने लगी है.

वेलस्पायर के दोनों संस्थापक साझेदार चंद्र शेखर और प्रतीक अलग-अलग शहरों से हैं. दोनों की मुलाकात चेन्नई की डॉ. एमजीआर यूनिवर्सिटी में हुई थी. वहां से दोनों ने 2011 से 2015 के बीच मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. किया था.

प्रतीक मुंबई के हैं. वहीं चंद्र शेखर रांची में पले-बढ़े. दोनों मध्यम वर्गीय परिवार से नाता रखते हैं. प्रतीक के माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं. उनके पिता ओएनजीसी में हैं. उनके मां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में काम करती हैं.

चंद्र शेखर ने पिछले साल अपना पीजीडीएम पूरा किया. जब उनके पास कोई काम नहीं था, तब उन्होंने वेलस्पायर लॉन्च करने का तय किया.

चंद्र शेखर के पिता किसान हैं और उनकी मां गृहिणी हैं. उन्होंने रांची के गुरु नानक हायर सेकंडरी स्कूल से कक्षा 10 और 12वीं की पढ़ाई पूरी की..

दिलचस्प यह है कि प्रतीक के पिता ने तय कर लिया था कि वे अपने बेटे को पढ़ने के लिए चेन्नई भेजेंगे. क्योंकि प्रतीक ने कक्षा 10 में तो 96 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, लेकिन कक्षा 12 में महज 46 प्रतिशत अंक लाकर परिवार को सदमा दे दिया था.

प्रतीक कहते हैं, “मेरे प्रदर्शन से निराश होकर मेरे पिता ने डांटा. उन्होंने कहा कि यदि मैं मुंबई में पढ़ता रहा ताे मैं कभी इंजीनियर नहीं बन पाऊंगा.” प्रतीक वियान्का एंटरप्राइजेस के सह संस्थापक हैं. यह एक पार्टनरशिप फर्म है, जो वेलस्पायर कूकर की मार्केटिंग करती है.

लेकिन कुछ साल बाद ही प्रतीक ने परिवार को गर्व का माैका दे दिया, जब उन्होंने अपने कक्षा के साथी चंद्र शेखर के साथ मिलकर एक कंपनी लॉन्च की, जो आठ महीने में ही मुनाफा कमाने वाली कंपनी बन गई.

ग्रैजुएशन के बाद प्रतीक ने मुंबई में आईसीएफएआई बिजनेस स्कूल (आईबीएस) से एमबीए किया. इंडियन ऑयल के एक ऑफर को ठुकराकर एक स्टार्टअप में नौकरी की.

प्रतीक कहते हैं, “मैं जानता था कि यदि मैंने कॉरपोरेट वर्ल्ड में प्रवेश किया तो चूहा दौड़ में फंस जाऊंगा और सीखने की प्रक्रिया थम जाएगी. लेकिन मैं जिस कंपनी से जुड़ा था, वह इतनी छोटी थी कि उसके पास ठीक-ठाक ऑफिस भी नहीं था. आगे चलकर मैंने कंपनी छोड़ दी. तीन साल के छोटे से समय में ही वह 100 करोड़ की कंपनी हो गई.”

मुंबई का यह स्टार्टअप फ्रूट ड्रिंक्स के पैकेट बनाता था. प्रचार-प्रसार की गतिविधियों के रूप में उन्होंने बोरीवली रेलवे स्टेशन पर ड्रिंक्स भी बेचे. यह ब्रांड बाद में मुंबई इंडियंस क्रिकेट टीम का ऑफिशियल ड्रिंक बना.
प्रतीक को कक्षा 12 में काफी कम अंक आए. तब परिजन ने उन्हें बीटेक के कोर्स के लिए चेन्नई भेज दिया.  

इस बीच, चंद्र शेखर ग्रैजुएशन के बाद मेंटेनेंस इंजीनियर के रूप में चेन्नई की एक कंपनी से जुड़ गए. वहां उन्होंने 2 साल काम किया.

बाद में, उन्होंने बिजनेस ऑपरेशन एनालिस्ट के रूप में दिल्ली की एक कंपनी जॉइन की. चंद्र शेखर कहते हैं, “वे पॉलिएस्टर बनाते थे. मुझे उनका आयात-निर्यात विभाग संभालने के लिए रखा गया था.” चंद्र शेखर ने बाद में 2018-20 के बीच नोएडा के जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से पीजीडीएम कोर्स किया.

भले ही दोनों अलग-अलग शहरों से थे, चंद्र शेखर और प्रतीक संपर्क में बने रहे और विभिन्न बिजनेस आइडिया के बारे में बात करते रहे. अक्टूबर-नवंबर 2019 में विकल्प तलाशने के लिए उन्होंने चीन और जापान की यात्रा की.

प्रतीक ने दिसंबर 2019 में नौकरी छोड़ी. तब तक चंद्र शेखर ने पीजीडीएम कोर्स पूरा कर लिया था. देश में लॉकडाउन लग गया था. इसलिए कोई कैंपस प्लेसमेंट नहीं हो सका और न ही वे कोई नौकरी खोज सके.

अब उनका इलेक्ट्रिक कूकर प्रोजेक्ट लॉन्च करने का समय आ गया था. दोनों ने बिना समय गंवाए गूगल फॉर्म्स से सर्वे किया और दोस्तों से लेकर रिश्तेदारों तक पहुंचे.

इससे उन्हें पता लगा कि बाजार में एक ऐसे प्रोडक्ट की जरूरत है. अगस्त 2020 में उन्होंने अपना बिजनेस लॉन्च कर दिया. बिक्री अमेजन के जरिए शुरू हुई. बाद में उनकी वेबसाइट ने उनका ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को लेकर विश्वास बढ़ा दिया.

चंद्र शेखर कहते हैं, “वर्तमान में सिर्फ 5 प्रतिशत भारतीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं. बहुत सारा ऐसा बाजार है, जिसका इस्तेमाल नहीं हुआ है. यदि हम इस मार्केट का 2 प्रतिशत भी इस्तेमाल कर सके तो हम हमारे बिजनेस के बादशाह बन जाएंगे.”

चंद्र शेखर कहते हैं कि वे बेहतर ग्राहक सहयोग मुहैया कराने पर ध्यान दे रहे हैं. उन्होंने लॉजिस्टिक्स सपोर्ट कंपनी से समझौता भी किया है.

कॉलेज के दिन युवाओं के लिए मस्ती भरे थे. वही युवा अब गंभीर उद्यमी हैं.  


वे कहते हैं, “किसी तरह की मरम्मत की जरूरत होने पर हम कूकर को ग्राहक के घर से बुलवा लेते हैं. उसे ठीक करते हैं और वापस ग्राहक के घर पहुंचा देते हैं. इसका कोई शुल्क नहीं लेते.”

इस कंपनी में तीसरे पार्टनर गगन जाराल हैं. पैकेजिंग से लेकर डिलीवरी तक का पूरा काम इन्हीं की देखरेख में होता है.

इस स्टार्टअप ने एक और ब्रांड क्लिंक ग्लास बॉटल्स लॉन्च किया है. चार बोतल के सेट की कीमत 520 रुपए है. 1000 मिली की इन बोतल का इस्तेमाल पानी, दूध, ज्यूस या ऑइल भरने में किया जा सकता है.

अब ये युवा तीन और प्रॉडक्ट लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं. ये हैं- ग्लास जार, एयर फ्रायर और किचन प्लेट्स.

निजी मोर्चे पर, दोनों क्रिकेट खेलनेे के शौकीन हैं. चंद्र शेखर तीन साल तक यूनिवर्सिटी टीम के कैप्टन रहे हैं. उनकी पसंदीदा किताब मार्क मेककॉरमैक की "व्हाट दे डोंट टीच यू एट हार्वर्ड बिजनेस स्कूल' है.

चंद्र शेखर ने खुद वीकेंड लीडर से संपर्क किया था. वे बताते हैं, “मैं वीकेंड लीडर का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं और प्रेरणा के लिए वेबसाइट पर प्रकाशित उद्यमियों की सफलता की कहानियां पढ़ना पसंद करता हूं.”

 

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