Milky Mist

Tuesday, 16 April 2024

जबलपुर के संकल्प ने उगाए दुनिया के सबसे महंगे मियाजाकी आम, जापान में 2.5 लाख रुपए किलो बिकते हैं, वे इन्हें इतना आम करना चाहते हैं कि भारत में 2 हजार रुपए किलो में बिकने लगें

16-Apr-2024 By सोफिया दानिश खान
जबलपुर

Posted 29 Jul 2021

किसान और रेस्तरां संचालक संकल्प सिंह परिहार हाल ही में दुनिया के सबसे महंगे आमों को उगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया के आकर्षण का केंद्र बन गए. ये आम उन्होंने मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर से लगभग 20 किमी दूर धेडागोआ गांव के अपने खेत में उगाए थे.

उनके खेत में उगे आमों की कीमत वैश्विक बाजार में करोड़ों रुपए है. तीन सुरक्षा गार्ड और आधा दर्जन क्रूर जर्मन शेफर्ड चौबीसों घंटे संकल्प के इन खेतों की रखवाली करते हैं.

संकल्प सिंह परिहार मध्य प्रदेश के धेडागोआ गांव के अपने खेत में दुनिया के सबसे महंगे मियाजाकी किस्म के आमों की खेती करते हैं. (फोटो: उमा शंकर मिश्रा)

संकल्प आम की जिस मियाजाकी किस्म को उगाते हैं, वह जापान में 2.5 लाख रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकती है. भारत में उन्होंने इन्हें 21 हजार रुपए प्रति किलो में बेचा. हालांकि उन्होंने अभी तक इनकी औपचारिक बिक्री शुरू नहीं की है. वे इस किस्म के प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

आमों के 2 बागों से सालाना 9 लाख रुपए कमाने वाले 46 वर्षीय किसान संकल्प कहते हैं, “मेरा अभी फल बेचने का इरादा नहीं है. मैं और अधिक पौधे लगाना चाहता हूं, ताकि भारत में लोगों को 2000 रुपए प्रति किलो में उपलब्ध करवा सकूं.”

एक बार जब मियाजाकी किस्म हजारों की संख्या में होने लगेगी, तो वे इसे खुले बाजार में बेचना शुरू कर देंगे. इसके बाद उन्हें आमदनी में वृद्धि होने की उम्मीद है.

संकल्प के पास आम के करीब 3,500 पेड़ हैं. इनमें मलाइका, आम्रपाली, हापुस, अल्फांसो, लंगड़ा और बॉम्बे ग्रीन जैसी आम हाइब्रिड किस्में भी शामिल हैं.

उनके खेत जबलपुर-चरगवां राजमार्ग पर स्थित हैं. आम के अलावा वे अमरूद, अनार, अंजीर, शहतूत, बिना गुठली वाले जामुन, चीकू और रोज एपल की लगभग नौ किस्में भी उगाते हैं.

संकल्प अपने खेत पर हर सप्ताहांत के दौरान पड़ोसी जिलों नरसिंहपुर, सागर, सिवनी और कटनी से आने वाले ढेरों लोगों को उदारतापूर्वक इनमें से कुछ फल खिलाते हैं.

मियाजाकी आम के बाग की रक्षा विशेष रूप से प्रशिक्षित जर्मन शेफर्ड करते हैं.  

साधारण आम 100 से 130 रुपए प्रति किलो बेचे जाते हैं. संकल्प 25 किमी तक बिना डिलीवरी शुल्क के थोक में आमों की आपूर्ति और वितरण करते हैं.

वह डिलीवरी के लिए सुबह 8 बजे घर से निकल जाते हैं, दोपहर 12 बजे तक लौटते हैं और फिर बाकी दिन खेत में बिताते हैं. वे आसपास के इलाकों के गरीब ग्रामीणों को बहुत कम दामों में ये आम बेचते हैं.

कृषि परिवार से ताल्लुक रखने वाले संकल्प के लिए जीवन हमेशा कठिन रहा. लेकिन चेन्नई के लिए ट्रेन में यात्रा करते समय एक अजनबी ने उन्हें मियाजाकी आमों से परिचित कराया. इन्हीं आमों ने आज संकल्प को एक प्रकार का सेलीब्रिटी बना दिया है.

उस अजनबी से हुई मुलाकात को संकल्प जीवन में आए फरिश्ते की तरह याद करते हैं. उसने संकल्प को मियाजाकी के पौधे दिए और आज तक उनसे संपर्क नहीं किया. संकल्प कहते हैं, “मैं 2016 में चेन्नई से कुछ बीज खरीदने के लिए ट्रेन में यात्रा कर रहा था. मुझे ट्रेन में एक आदमी मिला. उसने कहा कि वह चेन्नई से है.”

“हम दोनों बात करने लगे और पता चला कि दोनों के पास खेत हैं. फिर उसने मुझे दुर्लभ किस्म के आमों जैसे लाल और काले आम की तस्वीरें दिखाईं और मैं चकित रह गया. मैं उनके बारे में पहले कभी नहीं जानता था.”

फिर उस आदमी ने मियाजाकी आमों के बारे में बताया और पौधे भी दिखाए.

आसपास के जिलों के लोग संकल्प के खेत में ताजे आम खरीदने आते हैं.  

संकल्प कहते हैं, “मैंने उनसे 2500 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से 100 पौधे खरीद लिए. आम तौर पर मैं इतने पैसे अपने पास नहीं रखता. लेकिन उस दिन मुझे एक बड़े बिजनेसमैन के लिए बगीचा तैयार करने के एवज में अग्रिम पैसे मिले थे. मुझे निश्चित रूप से लगता है कि भगवान ने मुझे इस आदमी से मिलने के लिए निर्देशित किया और यह सब घटनाक्रम हुआ.”

संकल्प को उस व्यक्ति के बारे में अब काेई जानकारी नहीं है. मीडिया में इतनी खबरें आने के बाद भी उस व्यक्ति ने अब तक संकल्प से संपर्क नहीं किया है.

इस बीच, 2016 में लगाए गए पौधे बड़े हुए और पेड़ बन गए. पेड़ों ने साल 2020 में फल देना शुरू कर दिया. उसी साल चोरों ने कीमती आमों में से कुछ चुरा लिए. इसके बाद संकल्प को खेत की सुरक्षा के लिए गार्ड और कुत्तों को तैनात करना पड़ा.

जब उनके खेत पर दूर-दूर से आगंतुकों ने आने लगे, तो उन्हें एक रेस्तरां खोलने का विचार आया. फरवरी 2021 में, संकल्प ने ‘महाकाल बाबा की रसोई' भोजनालय खोला. यहां सात्विक भोजन उपलब्ध कराया जाता है.

300 रुपए में कोई भी पारंपरिक चूल्हों पर पके असीमित भोजन का आनंद ले सकता है. यह भोजन खेत में उगाए गए जैविक अनाज और मसालों का उपयोग करके बनाया जाता है.

संकल्प कहते हैं, “पूरा भोजन अमूल उत्पादों और ब्रांडेड तेल में पकाया जाता है. भोजन में दाल, बाटी, कढ़ी, रोटी, पापड़, सलाद, चटनी, आम का पना और मैंगो शेक परोसा जाता है.”

संकल्प अपनी पत्नी रानी के साथ. दंपति खेत में बने घर में ही रहते हैं.  

“शहरों में इसी अनुभव की कीमत आपको दोगुनी पड़ सकती है. लेकिन जब किसी समूह में अधिक मेहमान होते हैं, तो मैं खुशी-खुशी मुफ्त भोजन देता हूं और कम लोगों का ही शुल्क लेता हूं.

“एक सप्ताहांत में 50-100 लोग आते हैं. इनमें कई बार-बार दोस्तों और परिवार के साथ आते हैं, साथ ही नए लोगों को खेत से परिचित कराते हैं.”

लोगों के दिलों व आत्माओं को छूने और प्यार से सेवा करने का संकल्प का प्रयास निश्चित रूप से दिल जीत रहा है.

उनके खेत पर दस कर्मचारी हैं. ये उनकी अन्य प्रोजेक्ट में भी मदद करते हैं, जो उन्होंने फलों के बाग तैयार करने के लिए क्षेत्र के अन्य खेत मालिकों और कारोबारियों से लिए हैं.

सीजन के चार महीने आमों की फसल आती है और उन्हें बाजार में बेचा जाता है. साल के बाकी समय उनके कर्मचारी रेस्तरां और अन्य प्रोजेक्ट में मदद करते हैं.

संकल्प के पिता भी किसान थे. जीवन के शुरुआती समय में वे परिवहन व्यवसाय से जुड़े रहे और कुछ बसें भी चलाईं. संकल्प कहते हैं, “खेत पर आने वाले सभी लोगों से हमें बहुत प्यार मिल रहा है. मुझे विश्वास है कि भगवान मुझे भविष्य में भी बड़ी सफलता के लिए मार्गदर्शन देंगे.”

संकल्प ने कक्षा 12 की पढ़ाई गुरु गोबिंद सिंह खालसा साहिब स्कूल जबलपुर से पढ़ाई की और बी. कॉम गुरु गोबिंद सिंह खालसा कॉलेज जबलपुर से किया.

वे स्कूल के घंटों के बाद अजीबोगरीब काम करते थे ताकि उन्हें अपने माता-पिता से पॉकेट मनी नहीं मांगनी पड़े.

संकल्प के रेस्तरां में स्वस्थ सात्विक भोजन परोसा जाता है.

वे कहते हैं, “मैंने अपने पिता के एक दोस्त के ईंट भट्ठे पर कमीशन के आधार पर काम किया. मैं हर सप्ताह लगभग 300 रुपए कमा रहा था, जो ठीक-ठाक पैसा था. मैंने एक फिनाइल और पेंट कंपनी के लिए सेल्स एजेंट के रूप में भी काम किया.”

ग्रैजुएशन के बाद, उन्होंने परिवार की कृषि भूमि पर काम करने का फैसला किया क्योंकि उनके पिता का परिवहन व्यवसाय तब तक बंद हो चुका था.

अरहर दाल आईसीपीएल 87 की खेती से लेकर आम की हाइब्रिड किस्में उगाने तक उन्होंने काम किए. इस बीच ट्रेन से चेन्नई की यात्रा के दौरान भाग्य ने उन्हें तलाश लिया.

संकल्प ने 32 साल की उम्र में रानी से शादी की. उनके 10 और 12 साल के दो बेटे हैं. वे अपने खेत पर बने घर में रहते हैं, जो हरे-भरे फलों के पेड़ों से घिरा हुआ है.
 

आप इन्हें भी पसंद करेंगे

  • Taking care after death, a startup Anthyesti is doing all rituals of funeral with professionalism

    ‘अंत्येष्टि’ के लिए स्टार्टअप

    जब तक ज़िंदगी है तब तक की ज़रूरतों के बारे में तो सभी सोच लेते हैं लेकिन कोलकाता का एक स्टार्ट-अप है जिसने मौत के बाद की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर 16 लाख सालाना का बिज़नेस खड़ा कर लिया है. कोलकाता में जी सिंह मिलवा रहे हैं ऐसी ही एक उद्यमी से -
  • Success story of Wooden Street

    ऑनलाइन फ़र्नीचर बिक्री के महारथी

    चार युवाओं ने पांच लाख रुपए की शुरुआती पूंजी लगाकर फ़र्नीचर के कारोबार की शुरुआत की और सफल भी हुए. तीन साल में ही इनका सालाना कारोबार 18 करोड़ रुपए तक पहुंच गया. नई दिल्ली से पार्थाे बर्मन के शब्दों में पढ़ें इनकी सफलता की कहानी.
  •  Aravind Arasavilli story

    कंसल्टेंसी में कमाल से करोड़ों की कमाई

    विजयवाड़ा के अरविंद अरासविल्ली अमेरिका में 20 लाख रुपए सालाना वाली नौकरी छोड़कर देश लौट आए. यहां 1 लाख रुपए निवेश कर विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों के लिए कंसल्टेंसी फर्म खोली. 9 साल में वे दो कंपनियों के मालिक बन चुके हैं. दोनों कंपनियों का सालाना टर्नओवर 30 करोड़ रुपए है. 170 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. अरविंद ने यह कमाल कैसे किया, बता रही हैं सोफिया दानिश खान
  • Air-O-Water story

    नए भारत के वाटरमैन

    ‘हवा से पानी बनाना’ कोई जादू नहीं, बल्कि हकीकत है. मुंबई के कारोबारी सिद्धार्थ शाह ने 10 साल पहले 15 करोड़ रुपए में अमेरिका से यह महंगी तकनीक हासिल की. अब वे बेहद कम लागत से खुद इसकी मशीन बना रहे हैं. पीने के पानी की कमी से जूझ रहे तटीय इलाकों के लिए यह तकनीक वरदान है.
  • Bhavna Juneja's Story

    मां की सीख ने दिलाई मंजिल

    यह प्रेरक दास्तां एक ऐसी लड़की की है, जो बहुत शर्मीली थी. किशोरावस्था में मां ने प्रेरित कर उनकी ऐसी झिझक छुड़वाई कि उन्होंने 17 साल की उम्र में पहली कंपनी की नींव रख दी. आज वे सफल एंटरप्रेन्योर हैं और 487 करोड़ रुपए के बिजनेस एंपायर की मालकिन हैं. बता रही हैं सोफिया दानिश खान